Chetan Patel

ChetanPatelWorld Dec 1, 2025

Bhagavad Gita 2.64 Explained | राग-द्वेष से मुक्ति और आंतरिक शांति | Gujrati

श्लोक: रागद्वेषवियुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन्। आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति॥ अनुवाद: जो साधक राग (लगाव)…

ChetanPatelWorld Dec 1, 2025

Bhagavad Gita 2.63 Explained | क्रोध से पतन तक | Gujrati

श्लोक: क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥ अनुवाद:क्रोध से भ्रम…

ChetanPatelWorld Nov 29, 2025

Bhagavad Gita 2.62 Explained | मन का पतन कैसे शुरू होता है | Gujrati

श्लोक: ध्यायतो विषयान्पुंसः संगस्तेषूपजायते। संगात् संजायते कामः कामात् क्रोधोऽभिजायते॥ अनुवाद: जब मन किसी विषय पर…

ChetanPatelWorld Nov 28, 2025

Bhagavad Gita 2.61 Explained | इंद्रिय संयम और मन की स्थिरता | Gujrati

श्लोक: तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः। वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥ अनुवाद: जो साधक अपनी…

ChetanPatelWorld Nov 27, 2025

The New business Model for IT entrepenours

Disclaimer - it's morning thoughts - free, open and transparent Shifting the IT Business Model in the AI Era | A Roadmap…

ChetanPatelWorld Nov 27, 2025

Bhagavad Gita 2.60 Explained | स्थिर मन और इंद्रियों का नियंत्रण | Hindi

श्लोक: यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः। इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः॥ अनुवाद: हे अर्जुन विवेकशील और…

ChetanPatelWorld Nov 26, 2025

Day 86 Shreemad Bhagavad Geeta Shlok 2.59 - एक आत्म-चिंतन डायरी (Self-Reflection Journal)

भगवद् गीता 2.59 (Bhagavad Gita 2.59) विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः। रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते॥…

ChetanPatelWorld Nov 25, 2025

Day 85 Shreemad Bhagavad Geeta Shlok 2.58 - एक आत्म-चिंतन डायरी (Self-Reflection Journal)

भगवद् गीता 2.58 (Bhagavad Gita 2.58) यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः। इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस् तस्य प्रज्ञा…